इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला: पुलिस बिना नोटिस नहीं बुला सकती पूछताछ के लिए, बीएनएसएस की धारा 35 का पालन अनिवार्य

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि आपराधिक जांच के दौरान किसी संभावित आरोपी या व्यक्ति को पूछताछ के लिए बुलाने से पहले पुलिस को अनिवार्य रूप से बीएनएसएस की धारा 35 के तहत नोटिस जारी करना होगा। कोर्ट ने कहा कि बिना नोटिस किसी को थाने बुलाना कानून के खिलाफ है।

नोटिस के बिना थाने बुलाना अवैध: हाईकोर्ट
न्यायमूर्ति राजीव मिश्र और न्यायमूर्ति पद्म नारायण मिश्र की खंडपीठ ने यह आदेश महाराजगंज के सोनौली क्षेत्र की ज्ञानमती सहित अन्य याचिकाओं को निस्तारित करते हुए दिया। कोर्ट ने कहा कि जांच या पूछताछ के लिए बुलाने की स्थिति में विधिक प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।

याचिकाकर्ता के अधिकारों के उल्लंघन का मामला
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल का नाम एफआईआर में नहीं है, इसके बावजूद पुलिस बार-बार उन्हें थाने बुलाकर परेशान कर रही थी। इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन बताया गया।

पुलिस की कार्रवाई पर अदालत की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति से जांच के लिए पूछताछ आवश्यक है तो उसे उचित नोटिस देकर ही बुलाया जाए। बिना नोटिस किसी भी व्यक्ति को थाने बुलाना वैधानिक प्रक्रिया के विपरीत माना जाएगा।

अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
याचिकाकर्ता पक्ष ने यह भी मांग की कि नियमों के विपरीत कार्य करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए, ताकि नागरिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।

अन्य मामले में गिरफ्तारी पर रोक
इसी खंडपीठ ने एक अन्य मामले में कथित रूप से फर्जी पत्रकार बनकर सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने के आरोपी की गिरफ्तारी पर भी रोक लगा दी है। कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर छह सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

फर्जी पहचान और लोगो के दुरुपयोग का आरोप
मामले में आरोप है कि आरोपी ने एक न्यूज चैनल की रिपोर्टर होने का दावा कर मुख्यमंत्री और अन्य व्यक्तियों के साथ फोटो का गलत उपयोग किया और चैनल के लोगो का भी दुरुपयोग किया, जिससे जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया गया।

 

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